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अल्मोड़ा – कोरोना वायरस के बाद देशभर में लॉकडाउन हो गया था. मार्च के तीसरे सप्ताह से सभी स्कूल कॉलेज बंद कर दिए गए थे और अब अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है .लेकिन स्कूल कब खुलेंगे इस पर अभी भी चर्चाएं जारी है. इस लॉकडाउन में बच्चों की ऑनलाइन क्लास शुरू हुई और बच्चों ने घर से ही पढ़ाई की. घर में रहकर ही स्मार्टफोन के माध्यम से बच्चे पढ़ने लगे.लेकिन पहाड़ों में कभी इंटरनेट स्पीड कभी अभिभावकों के पास स्मार्टफोन का ना होना भी एक समस्या है. प्राइमरी विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाना भी एक मुश्किल कार्य है.

इन सब के बीच पहाड़ से एक शिक्षक ऐसे भी हैं जो इस महामारी के बीच सुरक्षा नियमो का पालन करते हुए घर-घर जाकर बच्चों का होमवर्क चेक करते हैं. प्राथमिक विद्यालय नौलाकोट के शिक्षक मनोज कुमार पंत घर-घर जाकर बच्चों के होमवर्क को देख रहे हैं.वही प्रतिदिन वह अपने घर पर भी शाम के समय बच्चों की विभिन्न समस्याओं का निराकरण भी करते हैं. शिक्षक पंत जी की मेहनत से ही लगातार पांचवें वर्ष विद्यालय की छात्र संख्या में वृद्धि हुई है. उनसे पूर्व विद्यालय में 23 विद्यार्थी थे जो अब बढ़कर 75 हो गए हैं.

आजकल कक्षाओं के ग्रुप बनाकर ऑनलाइन होमवर्क दिया जा रहा है. घर-घर जाकर होमवर्क की जांच की जा रही है. शिक्षक पंत ने लोगों के सहयोग और व्यक्तिगत रूप से विद्यालय में कंप्यूटर, प्रोजेक्टर ,संगीत आदि की व्यवस्था की और विद्यालय में कई निर्माण कार्य भी कराए. नौलाकोट के ग्राम वासियों ने शिक्षक पंत जी की प्रयासों की सराहना की है.उन्हें पहले उत्कृष्ट शिक्षक का पुरस्कार भी मिल चुका है.

यह उनकी मेहनत का ही फल है की आज उनके पढ़ाए सरकारी स्कूल के बच्चों को क्षेत्र के निजी स्कूल के बच्चों के बराबर आंका जाता है और हो भी क्यों ना पंत जी के पढ़ाने का तरीका ही कुछ ऐसा है कि हर एक बच्चा पढ़ाई में अव्वल रहता है.वे हर विद्यार्थी पर विशेष ध्यान रखते है.

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प्राथमिक विद्यालय नौलाकोट के शिक्षक मनोज कुमार पंत

इससे पूर्व वे प्राथमिक विद्यालय बिष्ट कोटुली में पढ़ाते थे. जहां उनके कार्यकाल में विद्यार्थियों की संख्या में काफी वृद्धि हुई और उनके छात्र हमेशा अव्वल रहे. लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद आज प्राथमिक विद्यालय बिष्ट कोटुली में विद्यार्थियों की संख्या 10, 12 तक ही रह गई है.और अब स्कूल में प्रत्येक वर्ष बच्चो की संख्या घटते ही जा रही है.

आज देश को ऐसे ही जैसे शिक्षकों की ही जरूरत है जो अपनी मेहनत और पढ़ाने की शैली के दम पर सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के बराबर खड़ा कर देते हैं.

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