Ghee Sankranti घी संक्रांति उत्तराखंड का लोक पर्व

Ghee Sankranti क्यों मनाया जाता है और इसका महत्व क्या है ?

Ghee Sankranti भाद्रपद यानी भादो माह में जब सूर्यदेव अपनी राशि परिवर्तन करते हैं तो उस संक्रांति को सिंह संक्रांति कहते हैं और इसी दिन उत्तराखंड में घी संक्रांति (Ghee Sankranti) मनाया जाता है. सिंह संक्रांति के दिन भगवान विष्णु, सूर्य देव और भगवान नरसिंह की पूजा की जाती है. इस दिन घी खाने की परंपरा रही हैं. इस कारण इसे घ्यूँ त्यार या घी संक्रांति भी कहा जाता है.घी का सेवन करने से ऊर्जा, तेज और यादाश्त और बुद्धि बढ़ती है.

उत्तराखंड में इस दिन मंदिरों में पूजा पाठ की जाती है और मंदिरों में अरबी के पत्तों (Taro Root) को भी चढ़ाया जाता है इस दिन घर में कई प्रकार के पकवान बनते हैं. त्यौहार के दिन बनने वाला मुख्य व्यंजन बेडु की रोटी है यह उड़द की दाल से बनती है. इसे घी,दही और अरबी (पिनालू) की सब्जी पापड़ (अरबी के बिना खिले पत्ते जिन्हें गाबा कहते हैं) के साथ खाना शुभ माना जाता है.

अरबी के पत्ते

इस लोक पर्व के साथ बहुत मान्‍यताएं भी जुड़ी हैं

आज से उत्तराखंड में काला महीना (काव महैंण) भी माना जाता है इस महीने में उत्तराखंड में खेती का काम नहीं होता सावन में गुड़ाई- निराई पूरी हो जाती है. घी संक्रांति त्‍योहार को किसान अच्‍छी फसल की कामना में मनाते हैं.
इस त्यौहार के समय पूर्व में बोई गई फसलों पर बालियां लहलहाना शुरु हो जाती हैं. साथ ही स्थानीय फलों अनार ,अखरोट आदि के फल भी तैयार हो जाते हैं. अखरोट के फल का सेवन भी घी त्‍योहार के बाद ही किया जाता है.

इस त्यौहार के पीछे मान्यता है कि इस दिन घी खाना बहुत जरूरी होता है. क्योंकि इसके पीछे एक डर भी छिपा हुआ है यह डर घनेल ( घोंगा ) (Snail) का होता है. कुमाऊं गढ़वाल में माना जाता है कि जो भी संक्राति के दिन घी का सेवन नहीं करता वह अगले जन्म में घोंगा बनता है. इसलिए इसी वजह से घी का सेवन किया जाता है. और शरीर के अंगों में घी को लगाया जाता है. यहां तक कि नवजात बच्चों को भी घी का सेवन कराया जाता है. जिसके घर में दूध घी नहीं होता उनके वहां गांव वाले दूध दही घी पहुंचाते हैं.

घनेल ( घोंगा ) (Snail)

Ghee Sankranti घी त्‍योहार को लेकर पौराणिक मान्‍यता है कि इस दिन घी का सेवन करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव से भी फायदा मिलता है. मुख्‍यत: कहा जाता है कि इस दिन घी खाने से राहु और केतु का व्यक्ति के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता.
उत्तराखंड के लोक पर्व घी सक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं


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