Harshad Mehta

दोस्तों अगर आप शेयर बाजार के बारे में जानकारी रखते हैं तो शायद आपने हर्षद मेहता (Harshad Mehta) का नाम जरूर सुना होगा हर्षद मेहता ने 1980 -90 के दशक में स्टॉक मार्केट की दिशा ही बदल डाली थी लेकिन बाद में 90 के दशक में हर्षद मेहता का नाम देश के सबसे बड़े घोटालों में आया हर्षद मेहता पर सुप्रीम कोर्ट ने 5000 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया तो आइए जानते हैं, कैसे एक मध्यम वर्गीय परिवार (Lower Middle Class) का लड़का स्टॉक मार्केट का बिग बुल (Big Bull) बना.

Harshad Mehta “The Big Bull”

हर्षद मेहता (Harshad Mehta) का जन्म 29 जुलाई 1954 को राजकोट जिले के पनेली मोती में एक गुजराती जैन परिवार में हुआ था. उनका प्रारंभिक जीवन कांदिवली में बीता, फिर उसके बाद उनका पूरा परिवार रायपुर के मोढ़ापारा, मध्य प्रदेश में रहने चले गए. जहाँ उनके पिता शांतिलाल मेहता एक कपड़ा व्यवसायी थे. उनके पिता का यह कारोबार ज्यादा चल नहीं पाया.

Harshad Mehta family

पिता शांतिलाल मेहता
मातारसीलाबेन मेहता
पत्नीज्योति मेहता
पुत्रअतुर मेहता Atur Mehta
भाईसुधीर, अश्वनी, हितेश मेहता


हर्षद मेहता (Harshad Mehta)
ने अपनी स्कूली शिक्षा होली क्रॉस हायर सैकेण्डरी स्कूल से की और1976 में लाजपतराय कॉलेज मुंबई से बी.कॉम की पढ़ाई पूरी की और अगले आठ साल तक कई तरह के काम किए जैसे मार्केटिंग, सीमेंट बेचने और हीरे छांटने आदि.

हर्षद मेहता (Harshad Mehta) की शेयर मार्केट में एंट्री

हर्षद मेहता के सपने इतने बड़े थे कि उन्हें छोटे-मोटे कारोबार पूरा नहीं कर सकते थे. वह जान चुके थे कि शेयर मार्केट की एक ऐसी जगह है जहां उनका हर सपना पूरा हो सकता है तब उन्होंने स्टॉक मार्केट में एंट्री करी.

सबसे पहले हर्षद मेहता ने बॉम्बे में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (NIACL) में नौकरी शुरू की और यहीं से उसकी स्टॉक मार्केट में दिलचस्पी बढ़ी. लेकिन कुछ समय बाद ही उन्होंने वहाँ से नौकरी छोड़ दी. नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने 1981 में हरिजीवनदास नेमीदास सिक्योरिटीज नाम की ब्रोक्रेज फर्म में बतौर जॉबर की नौकरी ज्वाइन कर ली और हर्षद मेहता ने प्रसन्न परिजीवनदास को अपना गुरु माना.

हर्षद मेहता ने प्रसन्न परिजीवनदास के साथ काम करके स्टॉक मार्केट के सारे पैंतरे सीख लिए. हालांकि उनकी शेयर बाजार में शुरुआत काफी नुकसान के साथ हुई. उनके द्वारा लगाया गया पैसा सारा शेयर बाजार में डूब गया लेकिन इस गलती से सीखते हुए उन्होंने अपना अध्यन जारी रखा और बाजार को बहुत बारीकी से परखा.

हर्षद मेहता किसी भी कंपनी में पैसा लगाने से पहले उस कंपनी का फंडामेंटल एनालिसिस जरूर करता था. और तो और कंपनी के भीतर की खबरें तक उसे पता होती थी.

बाजार के सारे गुर सीखने के बाद हर्षद मेहता ने जॉबर की जॉब छोड़ दी और 1984 खुद की कंपनी ग्रो मोर रीसर्च एंड असेट मैनेजमेंट (GrowMore Research and Asset Management ) की शुरुआत की और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में बतौर ब्रोकर मेंबरशिप भी ली. और यहाँ से शुरू हुई हर्षद मेहता की स्टॉक मार्केट में बेताज बादशाह बनने की कहानी.

हर्षद मेहता ने अपने भाई और अपनी टीम के साथ इस कंपनी को बहुत आगे तक पहुंचाया. कुछ ही सालों में हर्षद इंडियन स्टॉक मार्केट का एक बहुत बड़ा नाम बन चुका था. वह जिस चीज को छूता था वह सोना बन जाती थी. जिन कंपनियों में वह निवेश के लिए बोलता लोग आंख बंद कर उस कंपनी में पैसे लगा देते.

Harshad Mehta

मीडिया ने 1990-1991 में, मेहता की एक बढ़ी हुई छवि को चित्रित किया  लोग हर्षद मेहता को “स्टॉक मार्केट का अमिताभ बच्चन” “द बिग बुल” नाम से जानने लगे. “बिग बुल” उपनाम इसलिए दिया था क्योंकि उनके बारे में कहा गया था कि उन्होंने शेयर बाजार में बुल रन की शुरुआत की थी. मैगजीन में उसके कवर फोटो लगने लगे. 90 के दशक में वह सरकार को सबसे अधिक टैक्स देने वाला व्यक्ति बन गया.

हर्षद मेहता (Harshad Mehta) एक सेलिब्रिटी बन चुका था. उसके पास महंगी से महंगी गाड़ियां थी. उसके पास मुंबई में आलिशान 1550 स्कॉवर फीट के सी फेसिंग पेंट हाउस में एक मिनी गोल्फ कोर्स, स्विमिंग पूल भी था. हर्षद का नाम हर बड़े अखबार, मैगजीन के कवर पेपर पर आए दिन आने लगा.

Harshad Mehta

हर्षद मेहता के एसीसी (ACC) में पैसा लगाने के बाद मानो एसीसी के भाग्य ही बदल गए, क्योंकि एसीसी का जो शेयर 200 रुपये का था उसकी कीमत केवल 3 महीनों में लगभग में 9000 हो गई. ऐसे ही कई कम्पनियाँ थी जिनकी किस्मत रातो रात हर्षद ने बदल दी थी.

Harshad Mehta Scam

हर्षद मेहता स्कैम (Harshad Mehta Scam) देश के सबसे बड़े घोटाले के रूप में सामने आया. इस घोटाले को टाइम्स ऑफ इंडिया की पत्रकार सुचिता दलाल (sucheta dalal) ने उजागर किया.

कैसे हुआ घोटाला ? Harshad Mehta Scam

हर्षद मेहता ने उस समय बैंकिंग सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर बैंकिंग लेनदेन में हेराफेरी की और मेहता ने रेडी फॉरवर्ड डील के जरिए से बैंकों से फंड उठाया.

आरएफ डील के मायने शॉर्ट टर्म लोन से है. बैंकों को जब शॉर्ट टर्म फंड की जरूरत पड़ती है तो वे इस तरह का लोन लेते हैं. इस तरह का लोन कम से कम 15 दिनों के लिए होता है.

इसी का फायदा लेते हुए उसने फेक बैंकिंग रसीद (bank receipt) बनवाई और इसी रसीद के जरिए वे दूसरे बैंकों से पैसे लेकर शेयर में लगाता था शेयर बाजार में जैसे ही मुनाफा होता था, वो तुरंत बैंक को रसीद के बदले लिए पैसे लौटा देता था. इसके साथ ही वह एक बैंक से फेक बैंकिंग रसीद बनवाता था जिसके बाद उसे दूसरे बैंक से भी आराम से पैसा मिल जाता था.यह फ़र्जी काम इतना आराम से चल रहा था कि इसकी किसी को भनक तक नही लगी.

यानी कि कुछ ऐसा समझ लीजिए अगर हम किसी A व्यक्ति से पैसे उधार लेते हैं तो जब उसको पैसा चुकाना होता है तो हम B व्यक्ति से उधार लेकर उसके पैसे चुका देते हैं और जब B को पैसे देने की बारी आती है तो C से उधार लेकर उसको भी पैसे चुका देते हैं वह भी कुछ इसी तरह हेराफेरी करता था.

हर्षद मेहता की ये हेराफेरी तब तक ही चल पाई जब तक मार्केट ऊपर की तरफ बढ़ रहा था जैसे ही मार्केट गिरना शुरू हुआ तो हर्षद के बुरे दिनों की शुरुआत भी शुरू हो गई. बाजार में गिरावट के बाद जब वह बैंकों का पैसा 15 दिन के भीतर नहीं लौटा पाए तो उनकी पोल खुल गई.

23 अप्रैल 1992 में पत्रकार सुचेता दलाल ने सबसे पहले इस स्कैम का खुलासा किया. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी इस रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे एक स्टॉक ब्रोकर ने बैंकिंग सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर पैसे निकाले.

RBI की एक रिपोर्ट के मुताबिक 1992 का ये घोटाला 4000 करोड़ का था. इसमें सबसे बड़ा मामला SBI bank के साथ किए गए 600 करोड़ के फ्रॉड का था.

नवंबर 1992 में सीबीआई ने हर्षद मेहता को गिरफ्तार किया. इस घोटाले में उसका साथ देने वाले उसके भाई अश्विन और सुधीर को भी गिरफ्तार किया गया. 72 आपराधिक मामले और 600 से ज्यादा सिविल एक्शन सूट उसके खिलाफ दर्ज हुए.

Harshad Mehta

इस घोटाले के बाद हर्षद मेहता (Harshad Mehta) को शेयर मार्केट से भी बाहर निकाल दिया गया. शेयर बाजार से प्रतिबंधित हो जाने के बाद मेहता ने एकबार फिर बाजार गुरु के रूप में वापसी करी और एक समाचार पत्र में अपना कॉलम भी शुरू किया हालांकि सितंबर 1999 में बंबई हाईकोर्ट ने उसे दोषी करार दिया और 5 साल की कैद और 25 हजार जुर्माना लगाया.

भारत के प्रधान मंत्री पर रिश्वत आरोप 

हर्षद मेहता (Harshad Mehta) ने तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को पार्टी फंड के नाम पर एक करोड़ रुपए की घूस देने की बात कही थी. लेकिन कांग्रेस ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. नरसिम्हा राव ने इन आरोपों से इनकार कर दिया था. CBI जांच में भी इस आरोप को लेकर कोई सबूत नहीं मिला.

हर्षद मेहता की मौत Harshad Mehta Death

हर्षद मेहता (Harshad Mehta) ने जेल में सजा काटने दौरान देर रात सीने में दर्द की शिकायत की और उन्हें ठाणे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया जहाँ 31 दिसंबर 2001 को 47 साल की उम्र में उसकी मौत हो गयी मृत्यु के बाद उनके खिलाफ लंबित कई मुकदमों भी खत्म गए.

इस घोटाले को उजागर करने पर पत्रकार सुचेता को 2006 में पद्मश्री अवार्ड से भी नवाजा गया.

sucheta dalal
पत्रकार सुचेता को 2006 में पद्मश्री अवार्ड से भी नवाजा गया

हर्षद मेहता (Harshad Mehta) पर फिल्म और वेब सीरीज – SCAM 1992 , The Big Bull

आजकल हर्षद पे आधारित एक वेब सीरीज SCAM 1992 – The Harshad Mehta Story रिलीज़ हुई है जिसे आप SONY LIV APP पर देख सकते है. इसकी IMBd रेटिंग 9.6 है.और यह काफी अच्छी और ज्ञानवर्धक है इसके 10 पाठ है हर पाठ लगभग 50 मिनट का है अगर आप शेयर बाजार में रूचि रखते है तो आपको यह वेब सीरीज जरूर देखनी चाहिए

SCAM 1992 में लीड रोल में प्रतीक गांधी दिखेंगे और सुचेता दलाल के रोल में श्रेया धनवंतरी दिखाई देंगी. व ये सीरीज पत्रकार सुचेता दलाल और देबाशीष बसु की किताब ‘द स्कैम‘ पर आधारित है.

हर्षद मेहता (Harshad Mehta) पर आधारित एक फिल्म The Big Bull भी इस वर्ष रिलीज़ हो रही है इसमें लीड रोल में अभिषेक बच्चन, इलियाना डिक्रूज है.

Harshad Mehta
harshad & sudhir mehta

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