राजेंद्र सिंह धामी

 पिथौरागढ़  भारतीय वीलचेयर क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और उत्तराखंड के मौजूदा कप्तान राजेंद्र सिंह धामी इन दिनों पत्थर तोड़कर अपने परिवार की आजीविका जुटाने को मजबूर हैं। धामी पिथौरागढ़ जिले में स्थित अपने गांव रायकोट में मनरेगा योजना के तहत सड़क निर्माण में मजदूरी कर रहे हैं।

धामी ने 2017 मे भारत-नेपाल-बांग्लादेश त्रिकोणीय व्हीलचेयर क्रिकेट सीरीज में भारत का नेतृत्व किया था।राजेंद्र सिंह धामी 90% दिव्यांग हैं। 3 साल की उम्र में धामी लकवा से ग्रस्त हो गए थे। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और क्रिकेट के मैदान पर अपने प्रदर्शन से कई पुरस्कार जीते हैं।धामी ने इतिहास विषय में मास्टर डिग्री पूरी करने के साथ-साथ बीएड की डिग्री भी हासिल की है।

धामी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, ‘‘लॉकडाउन से पहले मैं रुद्रपुर (उत्तराखंड) में क्रिकेट खेलने में रुचि रखने वाले व्हीलचेयर से चलने वाले बच्चों को क्रिकेट की कोचिंग देता था। लेकिन, लॉकडाउन के कारण वह काम ठप हो गया और उसका नतीजा अब यह है। मैं पिथौरागढ़ में अपने गांव रायकोट आ गया। यहां मेरे माता-पिता रहते हैं।’’

धामी ने कहा, ‘‘मेरे माता-पिता बूढ़े हैं। मेरी एक बहन और छोटा भाई भी है। मेरा भाई गुजरात में एक होटल में काम करता था, लेकिन उसने भी लॉकडाउन के दौरान अपनी नौकरी खो दी। इसलिए मैंने मनरेगा योजना के तहत अपने गांव में काम करने का फैसला किया। सरकार से भी कोई मदद नहीं मिली है। यह मेरे जीवन का सबसे मुश्किल समय है।’’

मदद के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग मेरी मदद के लिए आगे आए हैं। उनमें अभिनेता सोनू सूद भी हैं। सोनू सूद ने धामी को 11 हजार रुपए भेजे थे। रुद्रपुर और पिथौरागढ़ में भी कुछ लोगों ने आर्थिक मदद की। लेकिन यह काफी नहीं था। जीने के लिए किसी भी तरह का काम करने में कोई समस्य नहीं है। मैंने मनरेगा में काम करने का फैसला इसलिए किया कि घर के नजदीक रह सकूं। यह मुश्किल समय है, लेकिन इससे भी निकल जाएंगे।’’

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