मुंबई:
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश की अर्थव्यवस्था और ब्याज दरों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा आर्थिक माहौल में ब्याज दरों (Interest Rates) में कटौती की फिलहाल कोई संभावना नहीं है। केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति के रुख में बदलाव करते हुए ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ यानी ‘संतुलित सख्ती’ का रुख अपनाने का फैसला किया है।
इसके साथ ही आरबीआई की एमपीसी ने सर्वसम्मति से नीतिगत दर यानी रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत करने का फैसला किया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की बड़ी बातें:
- कटौती का विकल्प नहीं: गवर्नर ने कहा कि आगे चलकर परिस्थितियों के अनुसार या तो रेपो रेट में और बढ़ोतरी हो सकती है या फिर यथास्थिति (नो-चेंज) बनी रहेगी। फिलहाल दरों में कटौती का कोई प्लान नहीं है।
- दरों में कितनी होगी बढ़ोतरी? ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दौर कितना लंबा चलेगा, यह आने वाले समय में महंगाई के आंकड़ों, क्रूड ऑयल और सप्लाई चेन के दबावों तथा ग्रोथ के आंकड़ों पर निर्भर करेगा।
- महंगाई का अनुमान: आरबीआई का अनुमान है कि अगली तीन तिमाहियों में औसत सीपीआई (CPI) मुद्रास्फीति करीब 5.8 फीसदी रहेगी। वहीं चालू वित्त वर्ष के दौरान कोर इंफ्लेशन लगभग 4.94 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
- नए रेट्स तय: मौद्रिक नीति में बदलाव के तहत स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट को बदलकर 5.25% कर दिया गया है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट को 5.75% किया गया है।
कैसी है देश की आर्थिक सेहत?
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी मजबूती के साथ खड़ी है। देश में निजी खपत और खर्च मजबूत बने हुए हैं, साथ ही फिक्स्ड इन्वेस्टमेंट के आंकड़े भी सकारात्मक हैं।
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि नॉन-ड्यूरेबल कंज्यूमर गुड्स और घरेलू हवाई यात्री ट्रैफिक जैसे कुछ सेक्टर्स में थोड़ी सुस्ती देखी गई है। इसके बावजूद, सर्विसेज पीएमआई (Services PMI) और मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई (Manufacturing PMI) दोनों का विस्तार क्षेत्र में बने रहना यह दिखाता है कि देश की आर्थिक गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
