नई दिल्ली। विशेष संवाददाता।
देश के बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को रफ्तार देने के लिए शुरू किए गए PM गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान (NMP) ने 5 साल के सफर में बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। सोमवार को जारी सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक, 11 अगस्त 2026 तक इस प्लेटफॉर्म के जरिए कुल 18.66 लाख करोड़ रुपये की 396 बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। इनमें से 256 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है और 198 पर तेजी से काम चल रहा है।
13 अक्टूबर 2021 को लॉन्च किया गया PM गतिशक्ति प्लान अब देशव्यापी प्लानिंग फ्रेमवर्क बन चुका है, जिसने अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच की दूरियों (सिल्ड एप्रोच) को खत्म कर दिया है।
एनबीटी टेक-अवे: क्या हैं गतिशक्ति के 5 बड़े अपडेट्स?
- 18.66 लाख करोड़ का इंफ्रा बजट: सड़क, रेलवे, पोर्ट्स और एयरपोर्ट्स समेत 396 मेगा प्रोजेक्ट्स पर काम तेज।
- वन-स्टॉप GIS प्लेटफॉर्म: 58 केंद्रीय मंत्रालयों और सभी 36 राज्यों/यूटी के डेटा को एक ही कॉमन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया गया है।
- 23,000+ डेटा लेयर्स एक्टिव: जियोस्पेशियल डेटा, सैटेलाइट इमेजरी और एनालिटिकल टूल्स के जरिए प्रोजेक्ट्स की सटीक मैपिंग।
- 6 सिद्धांत और 7 इंफ्रा इंजन: इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, लास्ट-माइल डिलीवरी जैसे 6 पिलर्स पर टिका है सिस्टम।
- खगड़िया-पूर्णिया कॉरिडोर का उदाहरण: बिहार में टेक्सटाइल, मेगा फूड पार्क और सीफूड पार्क जैसे 5 इकोनॉमिक नोड्स और 11 लॉजिस्टिक्स नोड्स को जोड़ा जा रहा है।
‘समय और पैसा… दोनों बचा रहा है नया डिजिटल फ्रेमवर्क’
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, यह डिजिटल प्लेटफॉर्म प्लानर्स को जियोस्पेशियल डेटा, सैटेलाइट इमेज और एडवांस्ड एनालिटिकल टूल्स एक ही जगह मुहैया कराता है। सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, जलमार्ग और यूटिलिटी नेटवर्क्स की एक साथ प्लानिंग होने से प्रोजेक्ट्स में देरी और अनावश्यक लागत (कॉस्ट ओवररन) की समस्या खत्म हो रही है।
“टेक्सटाइल-फार्मा क्लस्टर, डिफेंस कॉरिडोर, इलेक्ट्रॉनिक पार्क और एग्री जोन्स जैसे आर्थिक क्षेत्रों को सीधे लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से मैप किया जा रहा है, जिससे सामान और यात्रियों की आवाजाही पहले से कहीं ज्यादा तेज और आसान होगी।”
पर्यावरण सुरक्षा और कम मंजूरियां
गतिशक्ति मॉडल के तहत जमीन अधिग्रहण में तेजी, कम से कम फाइल अप्रूवल और पर्यावरण पर कम से कम असर को प्राथमिकता दी गई है। पब्लिक प्लेटफॉर्म पर 230 मंजूर डेटासेट और 23,493 से अधिक GIS डेटा लेयर्स उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि साइट एनालिसिस और कनेक्टिविटी मैपिंग में कोई अड़चन न आए।
