नई दिल्ली। उत्तर न्यूज़ ब्यूरो।
त्योहारी सीजन खत्म होने के बाद देश में डिजिटल पेमेंट करने वालों को बड़ा झटका लग सकता है। यूपीआई एवं सेवा संचालन समिति ने आज एक बड़ा फैसला लेते हुए यह संकेत दिए हैं कि त्योहारी सीजन के मद्देनजर चुनिंदा व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जा सकता है। हालांकि, इसे लागू करने की तारीख को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हुई है और इसके लिए सरकार या संबंधित संस्था की तरफ से अलग से अधिसूचना जारी की जाएगी।
क्या है एनपीसीआई और इसका काम? भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) भारत में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणालियों के संचालन के लिए जिम्मेदार देश की शीर्ष संस्था है। इसकी स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय बैंक संघ (आईबीए) द्वारा मिलकर की गई थी।
एनपीसीआई मुख्य रूप से अत्याधुनिक डिजिटल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए खुदरा भुगतान प्रणालियों में नवाचार (इनोवेशन) को बढ़ावा देने, परिचालन दक्षता बढ़ाने और देश के कोने-कोने तक डिजिटल भुगतान की पहुंच का विस्तार करने पर फोकस करता है। इसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसा मजबूत और सुरक्षित डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है, जहां बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े सभी पक्ष मिलकर नई और एडवांस्ड तकनीकों पर काम कर सकें।
एक गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में सफर आम जनता को बेहतर और सुलभ सेवाएं देने की अपनी प्रतिबद्धता के तहत एनपीसीआई को एक गैर-लाभकारी (नॉन-प्रॉफिट) कंपनी के रूप में स्थापित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की संपूर्ण बैंकिंग प्रणाली को भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक भुगतान तथा निपटान प्रणालियों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) उपलब्ध कराना है।
एनपीसीआई ने भारत की खुदरा भुगतान व्यवस्था को मजबूत, कुशल और समावेशी बनाने में ऐतिहासिक योगदान दिया है। संस्था ने समय-समय पर ऐसे कई क्रांतिकारी उत्पाद पेश किए हैं, जिन्होंने देश की भुगतान संस्कृति को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI)
- रुपे (RuPay) कार्ड
- नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस (NACH)
- इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS)
- नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (NETC – फास्टैग)
- आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AEPS)
- ई-रुपी (e-RUPI)
इन तमाम आधुनिक सेवाओं ने देश में पेमेंट सिस्टम की रफ्तार और सुलभता बढ़ाने के साथ-साथ वित्तीय समावेशन (फाइनेंशियल इंक्लूजन) को भी अभूतपूर्व बढ़ावा दिया है। एनपीसीआई के इन प्रयासों के कारण ही आज भारत दुनिया भर में डिजिटल भुगतान के मामले में अग्रणी देशों में खड़ा है और वैश्विक स्तर पर देश की साख मजबूत हुई है।
चार पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियां अपने कामकाज को और अधिक सुचारू रूप से चलाने के लिए एनपीसीआई की चार पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियां भी काम कर रही हैं। एनपीसीआई बोर्ड और भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी के बाद स्थापित इन कंपनियों के नाम निम्नलिखित हैं:
- एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL)
- एनपीसीआई भारत बिलपे लिमिटेड (NBBL)
- एनपीसीआई भीम सर्विसेज लिमिटेड (NBSL)
- एनपीसीआई टेक सॉल्यूशंस लिमिटेड (NTSL)
त्योहारी सीजन के तुरंत बाद आने वाले इस संभावित बदलाव (MDR) का डिजिटल कारोबार और दुकानदारों पर क्या असर पड़ेगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह नियम किन चुनिंदा लेन-देन पर और किस दर से लागू होगा।
