नई दिल्ली केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत वैश्विक प्रौद्योगिकियों से जुड़ते हुए रोजगार, कारोबार और निवेश के नए अवसर पैदा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। नई दिल्ली में आयोजित ‘दिल्ली संवाद: भविष्य के लिए तैयार भारत के लिए नीतियां’ कार्यक्रम में गोयल ने दावा किया कि आने वाले समय में भारत दुनिया का प्रमुख कार विनिर्माण केंद्र (ग्लोबल कार मैन्युफैक्चरिंग हब) बनेगा।
केंद्रीय मंत्री ने वैश्विक बाजारों से जुड़ाव, आत्मनिर्भरता, विश्वस्तरीय गुणवत्ता और देश की युवा शक्ति को भारत की आर्थिक प्रगति के लिए सबसे अहम स्तंभ बताया।
एनबीटी टेक-अवे: पीयूष गोयल के संबोधन की 5 बड़ी बातें
- ग्लोबल कार हब की ओर भारत: भारतीय बाजार की बढ़ती मांग को देखते हुए विदेशी ऑटोमोबाइल कंपनियां भारत में विनिर्माण बढ़ाएंगी। पुणे में लक्जरी कारों के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट इसका उदाहरण हैं।
- 1 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात लक्ष्य: ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को पूरा करने के लिए ट्रिलियन डॉलर के एक्सपोर्ट लक्ष्य को हासिल करने पर जोर।
- FTA से नए अवसर: ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (EU) जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ मुक्त व्यापार समझौतों से भारतीय कपड़ा, कृषि, फुटवियर और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों को बड़ा बाजार मिलेगा।
- क्वालिटी से समझौता नहीं: BIS और FSSAI जैसे संस्थानों से गुणवत्ता मानकों को और सुदृढ़ करने का आह्वान। गोयल ने कहा— “यदि हमने विश्व स्तरीय गुणवत्ता अपना ली, तो कोई शक्ति भारत को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।”
- पर्यटन और खान-पान का वैश्विक डंका: रसम, इडली, डोसा और फिल्टर कॉफी जैसे भारतीय व्यंजनों और समृद्ध पर्यटन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार की संभावनाएं।
‘दुनिया के लिए बंद नहीं, व्यापक रूप से खुले हैं भारत के दरवाजे’
वैश्विक जुड़ाव और आत्मनिर्भरता के संतुलन पर बात करते हुए गोयल ने साफ किया कि भारत दुनिया के लिए अपने दरवाजे बंद नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें व्यापक रूप से खोल रहा है।
“भारत का दृष्टिकोण दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकियों से जुड़ने का है। 1.4 अरब लोगों की बढ़ती घरेलू मांग अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए एक बड़ा अवसर है। इलेक्ट्रॉनिक्स और व्हाइट गुड्स की बढ़ती मांग से देश में सेमीकंडक्टर कारखानों समेत डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को भारी गति मिलेगी।”
युवा शक्ति और अंतरराष्ट्रीय मांग
जब दुनिया की कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं आबादी के बूढ़े होने (एजिंग पापुलेशन) की समस्या से जूझ रही हैं, तब भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जर्मनी और जापान जैसे विकसित देशों में भारतीय पेशेवरों व कुशल श्रमिकों की मांग लगातार बढ़ रही है, जो वैश्विक मंच पर भारत का परचम लहरा रहे हैं।
